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Saturday, 23 August 2025

मनुष्य के बार बार जन्म-मरण का क्या कारण है ?

 एक बार द्वारकानाथ श्रीकृष्ण अपने महल में दातुन कर रहे थे। रुक्मिणी जी स्वयं अपने हाथों में जल लिए उनकी सेवा में खड़ी थीं। अचानक द्वारकानाथ हंसने लगे। रुक्मिणी जी ने सोचा कि शायद मेरी सेवा में कोई गलती हो गई है; इसलिए द्वारकानाथ हंस रहे हैं।

रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, ‘प्रभु! आप दातुन करते हुए अचानक इस तरह हंस क्यों पड़े, क्या मुझसे कोई गलती हो गई? कृपया, आप मुझे अपने हंसने का कारण बताएं।’

श्रीकृष्ण बोले, ‘नहीं, प्रिये! आपसे सेवा में त्रुटि होना कैसे संभव है? आप ऐसा न सोचें, बात कुछ और है।’

रुक्मिणी जी ने कहा, ‘आप अपने हंसने का रहस्य मुझे बता दें तो मेरे मन को शान्ति मिल जाएगी; अन्यथा मेरे मन में बेचैनी बनी रहेगी।’


तब श्रीकृष्ण ने मुसकराते हुए रुक्मिणी जी से कहा, ‘देखो, वह सामने एक चींटा चींटी के पीछे कितनी तेजी से दौड़ा चला जा रहा है। वह अपनी पूरी ताकत लगा कर चींटी का पींछा कर उसे पा लेना चाहता है। उसे देख कर मुझे अपनी मायाशक्ति की प्रबलता का विचार करके हंसी आ रही है।’

रुक्मिणी जी ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा, ‘वह कैसे प्रभु? इस चींटी के पीछे चींटे के दौड़ने पर आपको अपनी मायाशक्ति की प्रबलता कैसे दीख गई?’

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, ‘मैं इस चींटे को चौदह बार इंद्र बना चुका हूँ। चौदह बार देवराज के पद का भोग करने पर भी इसकी भोगलिप्सा समाप्त नहीं हुई है। यह देख कर मुझे हंसी आ गई।’

इंद्र की पदवी भी भोग योनि है। मनुष्य अपने उत्कृष्ट कर्मों से इंद्रत्व को प्राप्त कर सकता है। सौ अश्वमेध यज्ञ करने वाला व्यक्ति इंद्र पद प्राप्त कर लेता है। लेकिन जब उनके भोग पूरे हो जाते हैं तो उसे पुन: पृथ्वी पर आकर जन्म ग्रहण करना पड़ता है।

प्रत्येक जीव इंद्रियों का स्वामी है; परंतु जब जीव इंद्रियों का दास बन जाता है तो जीवन कलुषित हो जाता है और बार-बार जन्म मरण के बंधन में पड़ता है। वासना ही पुनर्जन्म का कारण है। जिस मनुष्य की जहां वासना होती है, उसी के अनुरूप ही अंतसमय में चिंतन होता है और उस चिंतन के अनुसार ही मनुष्य की गति, ऊंच नीच योनियों में जन्म होता है। अत: वासना को ही नष्ट करना चाहिए। वासना पर विजय पाना ही सुखी होने का उपाय है।

बुझै न काम अगि डालते जाइये, वह और भी धधकेगी, यही दशा काम की है। उसे बुझाना हो तो संयम रूपी शीतल जल डालना होगा।

संसार का मोह छोड़ना बहुत कठिन है। वासनाएं बढ़ती हैं तो भोग बढ़ते हैं, इससे संसार कटु हो जाता है। वासनाएं जब तक क्षीण न हों तब तक मुक्ति नहीं मिलती है। पूर्वजन्म का शरीर तो चला गया परन्तु पूर्वजन्म का मन नहीं गया।

नास्ति तृष्णासमं दु:खं नास्ति त्यागसमं सुखम्।

सर्वांन् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते ।।

तृष्णा के समान कोई दु:ख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है। समस्त कामनाओं, मान, बड़ाई, स्वाद, शौकीनी, सुख भोग, आलस्य आदि का परित्याग करके केवल भगवान की शरण लेने से ही मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है।

नहीं है भोग की वांछा न दिल में लालसा धन की।

प्यास दरसन की भारी है सफल कर आस को मेरी।।



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महाभारत के श्रीकृष्ण और उनका रथ

 महाभारत के युद्ध में अर्जुन जब कौरवों के विरुद्ध लड़ने से विचलित हुए, तब उन्होंने अपने सारथी श्रीकृष्ण से कहा –

"मैं अपने बंधु-बांधवों पर शस्त्र कैसे उठाऊँ?" 

तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को धर्म और कर्तव्य का उपदेश दिया, जिसे हम आज श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से जानते हैं। 

 युद्ध में श्रीकृष्ण ने स्वयं शस्त्र नहीं उठाया, केवल अर्जुन के रथ के सारथी बने।

लेकिन वह रथ साधारण नहीं था –

उसमें हनुमानजी ध्वज पर विराजमान थे,स्वयं कृष्ण सारथी थे,

और अर्जुन धनुष-बाण से युद्ध कर रहे थे।

युद्ध समाप्त होने के बाद, जैसे ही श्रीकृष्ण रथ से उतरे, वह दिव्य रथ तुरंत जलकर भस्म हो गया। 

अर्जुन आश्चर्यचकित हुए, तब कृष्ण मुस्कुराकर बोले –

"पार्थ! यह रथ पहले ही शस्त्रों की मार से नष्ट हो चुका था। मेरी उपस्थिति के कारण ही यह अब तक सुरक्षित रहा।"

 यह कथा सिखाती है कि जीवन का रथ तभी सुरक्षित रहता है जब उसमें सारथी स्वयं भगवान हों।

जब कृष्ण सारथी बनते हैं, तो युद्ध कितना भी कठिन क्यों न हो – विजय निश्चित है। 

#जयश्रीकृष्ण #पार्थसारथी #महाभारत #श्रीमद्भगवद्गीता #


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Thursday, 10 October 2024

प्राचीन भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय के बारे मे जानिए

 भारत में शिक्षा और ज्ञान का एक विशाल इतिहास है। हमारे प्राचीन भारत के 25 प्राचीन विश्वविद्यालय... दुनिया भर से हजारों प्रोफेसर और लाखों छात्र यहां रहते थे और कई विज्ञानों और विषयों का अध्ययन और अध्यापन करते थे। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों की जानकारी दी जा रही है:

1.नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University):

स्थान: बिहार

स्थापना: 5वीं शताब्दी ईस्वी

विशेषता: यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था और इसमें विभिन्न विज्ञान, दर्शन, और धर्म का अध्ययन किया जाता था। यहाँ पर 10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक थे।


2.तक्षशिला विश्वविद्यालय (Taxila University):

स्थान: पाकिस्तान

स्थापना: 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व

विशेषता: यह भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। यहाँ पर चिकित्सा, कानून, कला, सैन्य विज्ञान आदि की शिक्षा दी जाती थी।


3.विक्रमशिला विश्वविद्यालय (Vikramshila University):

स्थान: बिहार

स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी

विशेषता: यह भी बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।


4.ओदंतपुरी विश्वविद्यालय (Odantapuri University):

स्थान: बिहार

स्थापना: 8वीं शताब्दी ईस्वी

विशेषता: बौद्ध शिक्षा और साहित्य का प्रमुख केंद्र।


5.मिथिला विश्वविद्यालय (Mithila University):

स्थान: बिहार

विशेषता: न्यायशास्त्र और तंत्र की शिक्षा के लिए प्रसिद्ध।


6.वल्लभी विश्वविद्यालय (Vallabhi University):

स्थान: गुजरात

स्थापना: 6वीं शताब्दी ईस्वी

विशेषता: यहां पर धर्म, कानून, और चिकित्सा की शिक्षा दी जाती थी।


7.स्रृंगेरी मठ (Sringeri Math):

स्थान: कर्नाटक

विशेषता: अद्वैत वेदांत का प्रमुख केंद्र।


8.कांचीपुरम विश्वविद्यालय (Kanchipuram University):

स्थान: तमिलनाडु

विशेषता: यहाँ पर तमिल साहित्य और दर्शन का अध्ययन किया जाता था।


9.पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (Pushpagiri University):

स्थान: ओडिशा

विशेषता: यह बौद्ध और जैन शिक्षा का केंद्र था।


10. उज्जयिनी विश्वविद्यालय (Ujjayini University):

स्थान: मध्य प्रदेश

विशेषता: यहाँ पर ज्योतिष, खगोल विज्ञान, और गणित की शिक्षा दी जाती थी।


11.कृष्णापुर विश्वविद्यालय (Krishnapur University) 

स्थान: पश्चिम बंगाल

विशेषता: विभिन्न विज्ञानों और संस्कृत की शिक्षा का केंद्र।


12.नेल्लोर विश्वविद्यालय (Nellore University):




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Friday, 13 September 2024

भारत देश संपूर्ण परिचय

 भारत देश विश्व का सबसे बड़ा लोकशाही देश है ।भारत देश को बिनसांप्रदायिक देश भी है । राजा 'भरत' के नाम से भारत देश का नाम भारत पड़ा । भारत को हिंदुस्तान भी कहा जाता है । यहाँ आपको भारत देश के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई है , हमें आशा है की आपको वह पसंद आएगा । 



प्राचीन नाम : आर्यावर्त, भरतभूमि , भरतखंड
अर्वाचीन नाम : भारत , इंडिया
भारत की राजधानी :  नई दिल्ली
विस्तार : करीबन ३२.९ लाख चो.किमी
जन संख्या : १ अरब २१ करोड़ (२०१५ )
राज्य : ३१
केंद्र शासित प्रदेश :
कुल जिले : ६४२
कुल गाँव : करीबन ६.४२ लाख
अक्षांशीय विस्तार : ८°४’उत्तरी अक्षांश से ३७ °६’ उत्तरी अक्षांश तक
देशान्तरीय विस्तार : ६८ °७’ पूर्वी देशांतर से ९७°२५’ पूर्वी देशांतर तक
भारत की सीमा : पूर्व में बर्मा ,पश्चिम में पाकिस्तान,उत्तर में हिमालय,दक्षिण में हिद महासागर
पूर्व से पश्चिम विस्तार : २९३३ कि.मी.
उत्तर से दक्षिण विस्तार : ३२१४ कि.मी.
भारत की स्थलीय सीमा कुल लम्बाई : १५२०० कि.मी.
स्वतंत्रता: १५ अगस्त १९४७ ( स्वतंत्रता दिवस )
प्रजासत्ताक (संविधान ): २६ जनवरी ,१९५०
राष्ट्रभाषा : हिंदी
राष्ट्रगीत : जन गण मन अधिनायक ....(रविन्द्रनाथ टागोर )
राष्ट्रद्व्ज: त्रिरंगा (केशरिया ,सफ़ेद ,हरा -बिच में अशोक चक्र )
राष्ट्रप्रतिक : चार शेर (त्रिमूर्ति )
राष्ट्रीय आदर्श शब्द : सत्यमेव जयते
राष्ट्रीय फल : आम
राष्ट्रीय फूल : कमल
राष्ट्रीय खेल : हॉकी
भारत की कुल भाषाएँ : लगभग १९५२



भारत देश के प्रमुख तीर्थ स्थान  




भारत में अनेक तीर्थ स्थान है और वो सरे जहा में मशहूर है ।भरा के प्रमुख तीर्थ स्थानों के बारे में दिशाओ के अनुशार चार विभाग बनते है ,उत्तर ,दक्षिण,पूर्व ,पश्चीम ।निचे सभी के विभागीय नाम है ।

उत्तर भारत : उत्तर भारत में तीर्थ धाम थोड़े कम है ।जिसमे प्रमुख हरिद्वार , ऋषिकेश ,बद्रीनाथ ,केदारनाथ ,कैलाश पर्वत ,हिमालय ,प्रयाग,अमरनाथ बाबा,उज्जैन ,बनारस ,चित्रकूट ,गोकुल,मथुरा,वृन्दावन, ताजमहल  

दक्षिण भारत : दक्षिण भारत में पुराने और  ऐतिहासिक इमारते, तीर्थ स्थान बहुत अच्छी कला का आज भी जग मशहूर है दक्षिण के तीर्थ स्थानों में प्रमुख रामेश्वरम,धनुकोष्ठी ,त्र्यंबक,महाबलीपुरम,हलेबिड ,हसन ,बेलूर,गोमतेश्वर ,मदुराई ,त्रिवेंद्रम ,पद्मनाभ स्वामी मंदिर  का शमाविष्ट होता है ।

पूर्व भारत : पूर्व भारत में प्रमुख जगन्नाथ पूरी ,भुवनेश्वर ,बुद्धगया,खजुराहो  की गणना होती है  ।

पश्चिम भारत : पश्चिम भारत में प्रमुख द्वारका ,सोमनाथ ,पावागढ़ ,डाकोर,अम्बाजी ,नाथद्वारा ,कांकरोली ,केशरियाजी मशहूर ही  ।



भारत देश में सबसे अधिक मशहूर 


तीर्थ स्थल :-धर्मो के अनुसार 



हिन्दू:प्रयागकाशी ,गया,(तिन यात्राधाम)बद्रीनाथ ,द्वारका ,जगन्नाथपुरी ,रामेश्वर,(चार यात्राधाम ),सोमनाथ,तिरुपति,केदारनाथ,अमरनाथ,द्वादश ज्योतिर्लिंग 
जैन : समेतशिखर (बिहार ), पलिताना (गुजरात),श्रवण ,बेलगोडा ।
बौद्ध : लुन्गिनी देवी (जन्मस्थान )बुद्धगया (बुद्ध पद ),सारनाथ (प्रथम उपदेश ),कुशिनारा (पारी निर्वाण ),कपिलवस्तु ,वैशाली,राजगिरी ,श्रावस्ती  ।
मुस्लिम : अजमेर ,हाजीमंगल,(मलंग गढ़ , जिल्ला : थाना )
शिख : अमृतसर ,आनंदपुर ,पटना ,नादेड (चार तख़्त )
ख्रिस्ती : वैलंगानी, मद्रास के पास मौलापुर (संत टोमसकी समाधी),गोवा का दो जीसस केथेड्रल 
पारसी : उदवाडा 

सबसे बड़ी नदिया : गंगा (सबसे लम्बी नदी -२६५५ किमी ),यमुना ,चम्बल,ब्रह्मपुत्रा ,महि,गोदावरी ,कृष्णा,कावेरी,नर्मदा,तापी ,बियास,सतलज,तुंगभद्रा,गोमती,कोसी,शोण,शरावती ,पूर्णा,रामगंगा ,दामोदर, गंडक  

प्रमुख बन्दरगाह : मुंबई ,मर्मगोवा ,मेंग्लोरम ,कोचीन ,कंडला,कलकत्ता,विशाखाटनम,न्हवाशिवा,पारादीप ,तूतीकोरिन 

अखात : खंभात का अखात ,मनोर अखात,कच्छ अखात 

सरोवर : कुदरती : वुलर,डाल(कश्मीर ),केलेरू (आंध्र प्रदेश),चिलका (उड़ीसा),पुलीकट (तमिलनाडु),ढेबर,पुष्कर,सांभर (राजस्थान),नल सरोवर (गुजरात),ब्रह्म (हरियाणा )
 कृत्रिम सरोवर : गोविंद सागर (भाकरा ),गाँधीसागर( चंबल ),नागार्जुन सागर (कृष्णा ),कृष्ण राजसागर(कवेरी),निझामसागर (गोदावरी),सरदार सरोवर (नर्मदा)

ऊँचे पर्वत : हिमालय ,विन्द्याचल ,अरवल्ली ,सातपुडा, काराकोरम ,पश्चिमघाट, आबू ,गिरनार ,गारो ,खासी, जेतीया,पतकोई,लुसाइ,महादेव,मैकल,पूर्वघाट,श्रेतुंजो । 

हिलस्टेशन : महाबलेश्वर ,माथेरान ,पंचगिनी(महाराष्ट्र),मसुरी,नैनिताल (उत्तर प्रदेश ),कोड़ाइकेनाल,उटाकामल (उटी) (तमिलनाडू ),सिमला ,कुलु-मनाली (हिमाचल प्रदेश),श्री नगर ,गुलमर्ग,पहेलगाव (कश्मीर),शिलोंग (मेघालय),दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल ),आबू (राजस्थान)

बाग बगीचे : निशात बाग ,शालीमार गार्डन (श्रीनगर ),नेशनल पार्क ,हेगिंग गार्डन (मुंबई ),लाल बाग (बेंगलोर ),मुग़ल गार्डन (दिल्ही ),बोटनिकल गार्डन (कलकत्ता),आल्फ्रेड पार्क (इलाहाबाद),वुन्दावन गार्डन (मैसूर),छत्री बाग (इंदोर), पिजोरा बाग ,रोक गार्डन (चंडीगढ़)

भारत के पवित्र मंदिर  


केदरनाथ -उत्तराखंड 
बद्रीनाथ - उत्तराखंड
अमरनाथ -कश्मीर
गाँधी स्मारक -कन्याकुमारी 
सोमनाथ मंदिर - गुजरात 
कमल (लोटस) मंदिर -नई दिल्ही 
काशी विश्वनाथ -वाराणसी 
नंदी मंदिर : कर्नाटक 
बौध मंदिर : गया 
मिनाक्षी मंदिर : मदुराई 
बेलूर मठ -कलकत्ता 
अक्षरधाम -गांधीनगर 
अक्षरधाम -दिल्ही 
साइबाबा मंदिर -शिर्डी 
वैष्णो देवी -जम्मू 
हर की पौड़ी -हरीद्वार 
खजुराहो मंदिर -मध्यप्रदेश 
महाबलीपुरम -तामिलनाडू 
जगन्नाथ मंदिर -पूरी 
गंगोत्री मंदिर -उत्तराखंड 
बिरला मंदिर -नई दिल्ही 
सूर्य मंदिर-कोणार्क 
सारनाथ मंदिर -उत्तरप्रदेश 
भुक्तेश्वर मंदिर -भुवनेश्वर 
शंकराचार्य मंदिर -कश्मीर 
बिरला मंदिर -जयपुर 
रोक मंदिर -तमिलनाडु 
कामाख्या मंदिर -आसाम 
मुक्तिधाम -नाशिक 



भारत की ऐतिहासिक इमारते 


सुवर्ण मंदिर : अमृतसर 
गुरुद्वारा सीस गंज -नई दिल्ही 
दुर्गियाना मंदिर- अमृतसर 
संसद भवन -नई दिल्ही 
केंद्रीय सचिवालय -नई दिल्ही 
जामा मस्जिद -नई दिल्ही 
लाल किल्ला -नई दिल्ही 
गेट वे ऑफ़ इंडिया -मुम्बई 
इंडिया गेट -नई दिल्ही 
जंतर-मंतर-नई दिल्ही 
हवा महल -जयपुर 
ताजमहल -आगरा 
कुतुबमीनार -नई दिल्ही 
गोल्डन ब्रिज -भरूच 
हवरा ब्रिज -कलकत्ता 
विजय स्तंभ -चित्तोड़गढ़ 
चार मीनार -हैदराबाद 
हुमायु मकबरा -नई दिल्ही 
साची स्तूप -मध्यप्रदेश 
राजघाट- दिल्ही  
शांतिवन - दिल्ही 
विजयघाट -दिल्ही 

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विश्व में पहेचाना जाता है भारत देश अपनी भारतीय संस्कृति के लिए जानिए

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है जो लगभग ५००० हजार वर्ष पुरानी है। विश्व की पहली और महान संस्कृति के रुप में भारतीय संस्कृति को माना जाता है | पुरे विश्व में भारत देश अपनी संस्कृति के लिए पहचाना जाता है | भारतीय संस्कृति को विश्व की सभी संस्कृतियो की जननी कहा जाता है |भारतीय संस्कृति में पहेले धर्मं की संस्कृति को जाना जाता है | भारत देश बिनसांप्रदायिक देश है| इस देश की सबसे बड़ी संस्कृती में ये बात आती है | बिनसांप्रदायिक का अर्थ होता है सभी धर्मं के लोग को रहेने का अधिकार और कोई भी धर्मं अपनाने का अधिकार |भारत देश में हिन्दू,मुस्लिम,शिख,पारशी,इसाई, जैन सभी धर्मो के लोग हिल मिल कर रहेते है और एक दुशरे से कदम से कदम मिलकर चलते है |भारत देश में बड़े बड़े संत महात्मा और रिशिमुनियो, ने हमें धर्मं ग्रन्थ, वेद, उपनिषद, पूरण,श्रीमद भगवद जैस धर्मं ग्रन्थ, और सभी धर्मो के धर्मं ग्रन्थ की बहुत ही बड़ी भेट दी है , जिससे हमें अच्छे और सरल जीवन जीने के तरीके सिख सखते है |



भारत देश पर मुघलो , अंग्रेजो ,राजपूतो जैसे अनेको ने राज किया और उन्होंने ऐसे ऐसे इमारतों और ग्रंथो की रचना की की आधुनिक समय में हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते | उससे पहले कहा जाता है की सतयुग में भगवान ने भी इस भारत देश की धरती पर अवतार लिए है | किसी भी देश की संस्कृति में ऐसी बात नहीं लिखी होती जो भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है | इस देश में श्रीराम,श्री कृष्ण,संत कबीर,महमद साहेब पयगम्बर, गुरु गोविंद ,शंकर पार्वती ,अल्लाह, प्रभु इशु, जैसे भगवन को पूंजा जाता है | भारत देश सम्राट अशोक, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप,रानी लक्ष्मी बाई,पन्ना धाइ , सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे वीर की भूमि है | स्वामी विवेकानंद ,राज राम मोहनराइ ,महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, जैसे देश सेवको ने इस देश की संस्कृति को बचाने के लिए अपने प्राण तक दाव पर लगा दिए | 

भारतीय संस्कृति आज भी हमें धर्म का ज्ञान,रीती रिवाजो,जीवन जीने के निजी तरीके,मान सन्मान,त्याग,बलिदान, हिलमिल कर रहना , सत्य , अहिंसा, जरूरत मंदों कि मदद करना जैसे मूल्यों को सिखाती है | आज भी सरे विश्वके लोगो ने भारतीय संस्कृति को अपनाया है |भारतीय संस्कृति में स्त्री को बहुत मन सन्मान दिया जाता है और घर की इज्जत माना जाता है | हिन्दू धर्म में गृह लक्ष्मी माना जाता है | भारत में दिन सूर्य नमस्कार के साथ शुरु होता है | इसमें लोग सूर्य को जल चढ़ाते हैं और मंत्र पढ़कर प्रार्थना करते हैं | भारतीय लोग प्रकृति की पूजा करते हैं और यह इस संस्कृति की अनूठी बात है| हिंदू धर्म में पेड़ों और जानवरों को भगवान की तरह पूजा जाता है | लोग भगवान में विश्वास रखते हैं और कई त्यौहारों पर उपवास रखते हैं| वे सुबह का ताज़ा खाना गाय को और रात का आखिरी खाना कुत्ते को देते हैं | दुनिया में कहीं भी इस तरह की उदारता नहीं देखी जाती |


हमारे राष्ट्र की ये महान संस्कृति है कि हम बहुत खुशी के साथ अपने घर आये मेहमानों की सेवा करते है क्योंकि मेहमान भगवान का रुप होता है इसी वजह से भारत में “अतिथि देवो भव:” का कथन बेहद प्रसिद्ध है| हमारी संस्कृति की मूल जड़ इंसानियत और आध्यात्मिक कार्य है| भारत देश के लोग अपने उत्सव जैसे की दिपावली , होली,रक्षाबंधन, नवरात्री,दशहरा,जन्माष्टमी,नाताल, ईद-ए-मिलाद , पतेती, बैसाखी जैसे त्यौहार धामधूम से मनाये जाते है , और भारतीय संस्कृति का डंका सारे विश्व में बजाते है | भारत देश के लोक मेले तो भारतीय संस्कृति का एक अहम् हिस्सा है |भारतीय शास्त्रीय नृत्य, जैसे भरतनाट्यम, कथकली, कत्थक, मणिपुरी, ओडिसी और कुचिपुड़ी मुख्य तौर पर नाट्य शास्त्र, पुराण और शास्त्रीय साहित्य और रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों के संकेतों का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक आयना सारे विश्व के सामने है |भरता के कारीगरो की कला कारीगरी के उदहारण के रूप में ताजमहल, लाल किल्ला, कुतुबमीनार ,सोमनाथ मंदिर,पद्मनाभ स्वामी मंदिर,चर्च ,गिरजाघर जैसी कलात्मक इमारते पुराने समय से भारतीय संस्कृति का प्रचार कई सालो से पुरे विश्व में कर रहे है और एक अद्भुत कलात्मक कारीगरी का जीता जागता उदहारण है |

भारतीय संस्कृति हमें बहुत ही सिकहती है | आज नयी पीढ़िया हमारी संस्कृति को भुलाकर दुशरे देश की संस्कृत अपनाने जा रही है पर सचमे भारतीय संस्कृति को बहार के देश और लोग भी अपना रहे है , तो हम भारतीय है , तो अपनी संस्कृति को कभी भूलना नहीं चाहए ,बल्कि सरे विश्व में इसका प्रचार करना चाहए |

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